Part 2 Hasi Majak ke chutkule Series

Hasi Majak ke chutkule: मेरा-मेरा

पत्नी – पति से, आप हमेशा, हर बात में मेरा-मेरा ही करते रहते हो,
मेरी कार, मेरा बेटा, मेरा घर, मेरा आफिस. कभी तो कुछ हमारा भी कह दिया करो, थोड़ी देर बाद फिर पत्नी बोली अब बेवकूफों की तरह क्या ढूंढ रहे हो?
पति – हमारा कच्छा।

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Hasi Majak ke chutkule: बिस्तर में चाय-नाश्ता चाहिये

वीरू – बसन्ती से, कान खोल के सुन लो, मुझे कल से बिस्तर में ही
चाय-नाश्ता चाहिये।

बसन्ती – ठीक है, मैं आज से तुम्हारा बिस्तर रसोईघर में लगा दूंगी।

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Hasi Majak ke chutkule: बीमार पति और पत्नी

एक बीमार पति काफी दिन बाद होश में आते ही बड़बड़ाने लगा, मैं कहां हूँ, मुझे लगता है कि मैं स्वर्ग पहुंच गया हूँ।

पत्नी – नहीं डार्लिंग परेशान मत हो, अभी तो तुम मेरे साथ ही हो।

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Hasi Majak ke chutkule: दो-दो शादियों का चलन

 वीरू – आजकल दो-दो शादियों का चलन क्यों शुरू हो गया है?

जय – शादी की गाड़ी हमेशा दो पहियों पर चलती है, अब अगर एक
पहिया खराब हो जाये, तो गाड़ी खड़ी करने से तो अच्छा है कि आदमी एक स्टेप्नी पहले से ही साथ ले कर चले तो मुश्किल नहीं होती।

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Hasi Majak ke chutkule: बड़ा फैसला

जय वीरू से, कमाल है, विवाह के 10 साल बाद भी आज तक तुम्हारा पत्नी से कभी झगड़ा होते हुए नहीं देखा।
वीरू – हमने पहले दिन ही तय कर लिया था, कि घर के छोटे-छोटे
फैसले मेरी पत्नी करेगी और मैं सिर्फ बड़े फैसले करूंगा।
जय – क्या इससे कभी झगड़ा नहीं होता?
वीरू – आज तक कभी कोई बड़ा फैसला लेने की नौबत ही नहीं आई, तो झगड़ा होगा कैसे?

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